मानव जीवन बहुत ही निर्मल होता है। मानव जीवन में सात्विकता, सज्जनता, उदारता और चरित्र का उत्कर्ष होता है। वह स्वयं का ही नही बल्कि अपने संपर्क में आने वाले सभी लोगो का कल्याण करता है। इसके विपरीत तमाम तामसी वृत्तियाँ मनुष्य को पतनोन्मुखी करती रहती है। एक पतनोन्मुखी व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विषदायी होता है। प्राचीनकाल से ही मनुष्य किसी न किसी मदिरा पान का सेवन करता रहा है जिन्हे आज एल्कोहल के नाम से भी जानते है। मदिरा मनुष्य को असंतुलित बनाती है। शराबी व्यक्ति से किसी भी समाज की बुराई की अपेक्षा की जा सकती है। मादक पदार्थो के सेवन से जहां मनुष्य का नैतिक पतन होता है वहीं वह परिवार व समाज से भी दूर होता जाता है। शुरू-शुरू में जहां लोग शौक के रूप में नशा करते हैं, और फिर दोस्तो संग मुफ्त में पीना-पिलाना शुरू कर देते है और कहते है न अच्छे रास्ते पर चलने के लिए कोई साथ नहीं देता है और बुरे रास्तों पर चलाने वाले हजारों मिल जाते है। इस नशा को लोग अपने हर मर्ज की दवा मान लेते है और वो कहावत भी ठीक जान पड़ती है कि यदि किसी की चीज़ की लत लग जाये तो छुड़ाएँ जल्द नही छुटती है, ऐसे मनुष्यो का स्वास्थ्य भी लड़खड़ाने लगता है।
आज की शिक्षित युवा पीढ़ी भी इन मादक पदार्थो का शौकीन बन गयी है, इसके चपेट में आकर अपना नैतिक व सामाजिक मन-सम्मान खो बैठते है। मानसिक रूप से इतने पीड़ित हो जाते है कि ये लोग अपने को ही प्रताड़ित करने लग जाते है। ये अपने आदत से इतने मजबूर हो जाते है कि राष्ट्र की मुख्यधारा से तो अलग बात है यह समाज से भी वंचित हो जाते है। नशीले पदार्थो के सेवन से शारीरिक रूप से ये इतने कमजोर हो जाते है कि बुढ़ापे कि दहलीज़ पर पहुँचने से पहले ही घुटने टेकने को मजबूर हो जाते है।
शराबी व्यक्ति शराब को पीकर विवेकशून्य हो जाता है और व्यर्थ में असंगत और अनिर्गल प्रलाप करने लगता है। उनकी चेष्टाओं में अश्लीलता का समावेश हो जाता है। वह शिक्षा, संस्कार और सामाजिक मान्यताओं को अनुचित व्यवहार करने लगता है। जिसके कारण समाज में अराजकता को जन्म मिलने के साथ क्राइम की उत्पत्ति मिलती है। जिस परिवार का मुखिया शराबी व नशेड़ी होता है उस परिवार की स्थिति काफी दयनीय होती है, क्योकि उसका सीधा प्रभाव उस परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ती है और उस घर में महिला को भी कई रूप से प्रताड़ित किया जाता है और उनकी सुरक्षा व भविष्य भी अधर में होता है। साथ ही उस परिवार मे पल रहे नन्हें बच्चों पर भी प्रभाव पड़ता है, कुछ को तो अपनी शिक्षा-दीक्षा व संस्कार से भी वंचित होना पड़ता है।
दूसरी तरफ अब तक की सरकार नशीले पदार्थ के सामने बौना ही साबित हुई है क्योकि अब तक कोई भी सरकार इस पर पूर्णतः अंकुश नही लगा पायी है। इनके नशामुक्ति के दावे अब तक सिर्फ खोखले साबित हुए है। विषैली शराब के दुष्परिणाम को रोज़ हम अखबारो मे पढ़ते है। आर्थिक संकट व कम दाम में मिलने के कारण व्यक्ति घटिया शराब पीने लगता है। शराब बेचने वाले भी ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में शराब में मिलावट कर देते है। मिलावटी शराब अब तक न जाने कितनी जिंदगियाँ ले चुकी है, लेकिन फिर भी यह प्रक्रिया अनवरत जारी है।
पुलिस और सरकार के नाक के नीचे यह काम बहुत तेजी से हो रहा है। लोग शराब पी रहे है और लोग मर रहे है, अखबारें छप रही है और फिर रद्दी के भाव बिक भी जा रही लेकिन इस मुद्दे पर ध्यान नही दिया जा रहा। ध्यान दे भी क्यों सरकार...कोई भी सरकार ये नही चाहेगी कि जो उन्हे सर्वाधिक टैक्स देता हो उस पर अंकुश लगाए और अपने राजस्व से हाथ धो बैठे। नशामुक्ति अभियान टैक्सरूपी समुद्र में विलुप्त हो गए। साथ ही इस टैक्स रूपी समुद्र मे राष्ट्र कि नारी सशक्तिकरण अभियान भी गुम-सा हो गया है। क्योकि नशीले पदार्थ के सेवन के बाद महिलाओ पर अत्याचार, बलात्कार एवं उत्पीड़न कि घटनाओं में वृद्धि हुई है। जिस देश में, समाज में सुख शांति स्थापित करने में यदि कोई भी मनुष्य बाधक बनता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाही का प्रावधान है लेकिन आज उसी देश में नारी सुरक्षा व न जाने कितने समस्याओ के बाधक व उनकी दुख-भरी चीखें इन नशीले पदार्थो के टैक्स के आगे फीकी पड़ जाती है। कभी कभी ऐसा प्रतीत होता है कि इस मोटी रकम के आगे इंसान व इंसानियत का कोई मोल नहीं रह जाता है। एक तरफ सरकारे अपने दावो के प्रति सार्थकता दिखाती आ रही है, दूसरी तरफ नशीले पदार्थो के प्रचार- प्रसार में कोई कमी नही बरती है। आज की हालत ये कि यदि आप किसी शहर या कस्बे जाये तो आपको वहाँ बुनियादी चीजे व पाठशाला मिले न मिले लेकिन मधुशाला अवश्य मिल ही जाएगा।
अब सरकारो को अपनी राजस्व प्रलोभन त्याग, शराब एवं नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाकर राष्ट्र एवं आम जन की समस्याओं पर ध्यान देनी चाहिए और सम्पूर्ण भारत को नशा-मुक्त कर नारी-सशक्तिकरण अभियान को गति प्रदान करते हुए समूचे भारत राष्ट्र में अमन चैन स्थापिन करना चाहिए और विकासशील भारत को विकसित भारत का प्रारूप प्रदान करें।
धन्यवाद !
शिवम कुमार गुप्ता
विधि छात्र
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