जानिये क्या है RTI ? बहुत महत्त्वपूर्ण है सूचना का अधिकार !

 


भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और जनता अपने द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को शासन करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही यह अपेक्षा करती है कि सरकार पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का पालन करेगी। यह जनप्रतिनिधि/ सरकार अपने कर्तव्यों को भूल कर स्वयं का हित साधने में लग जाते है और यह भूल जाते हैं कि जनता ने उन्हें चुना है और जनता ही देश की असली मालिक है एवं सरकार उनकी चुनी हुई नौकर। इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है, कि जो सरकार उनकी सेवा में है, वह क्या कर रही है?

 

प्रत्येक नागरिक सरकार को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष माध्यम से टेक्स देती है। यहां तक एक सुई से लेकर एक माचिस तक का टैक्स अदा करती है। सड़क पर भीख मांगने वाला भिखारी भी जब बाज़ार से कोई सामान खरीदता है, तो टैक्स अदा करता है। इसी प्रकार देश का प्रत्येक नागरिक टैक्स अदा करता है और यही टैक्स देश के विकास और व्यवस्था की आधारशिला को निरन्तर स्थिर रखता है। इसलिए जनता को यह जानने का पूरा हक है कि उसके द्वारा दिया गया, पैसा कब, कहाँ, और किस प्रकार खर्च किया जा रहा है ? इसके लिए यह जरूरी है कि सूचना को जनता के समक्ष रखने एवं जनता को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया जाए, जो एक कानून द्वारा ही सम्भव है। सूचना का अधिकार अर्थात राईट टू इन्फारमेशन

 

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आमलोगों को 'सूचना का अधिकार' प्रदान करने का तात्पर्य होता है, जनभागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया सराहनीय कदम। क्योंकि किसी भी संवैधानिक सत्ता से समुचित सूचना पाने का जो अधिकार पहले सिर्फ जनप्रतिनिधियों के पास होता है, वही कमोबेश इस कानून के माध्यम से जनता में भी हस्तांतरित कर दिया गया है। 

 

यदि आम लोगों के द्वारा इसका सदुपयोग किया जाए तो सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार में काफी कमी आ सकती है। इससे विकास और सुशासन की अवधारणा परिपुष्ट होती है। लेकिन यदि इसका किसी भी प्रकार से दुरुपयोग किया जाए अथवा दुश्मन देशों से एकत्रित आंकड़े व जानकारियां साझा की जाने लगें तो किसी भी शासन द्वारा स्थापित व्यवस्था की स्वाभाविक गति भी अवरुद्ध हो सकती है। शायद यही वजह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता व अखंडता जैसे कतिपय अहम पहलुओं के मद्देनजर कुछ सूचनाओं को मांगने का जनता का अधिकार ही इस कानून में कानूनन प्रतिबंधित कर दिया गया है।

 

वर्ष 2005 में भारत में अस्तित्व में आया सूचना का अधिकार कानून

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यू.पी.ए.) की सरकार पारदर्शिता युक्त शासन व्यवस्था एवं भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाने के लिए 12 मई 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 संसद में पारित किया, जिसे 15 जून 2005 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली और अन्ततः 12 अक्टूबर 2005 को यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू किया गया

 

सूचना का अर्थ क्या है?

Right to Information Act की धारा 2(f) में बताया गया कि सूचना का अधिकार किसी भी रुप में सामग्री अर्थात केवल दस्तावेज ही नहीं इसमें दस्तावेज ईमेल, रायसिफारिश, प्रेस-रिलीज, सर्कुलर, आर्डर, लॉग बुक, संविदा, रिपोर्ट तथा कोई भी डाटा जो इलेक्ट्रॉनिक रूप में है, प्रत्येक वह चीज जो लोक प्राधिकारी द्वारा रखी जाती है वह सूचना है। ऐसी सूचना जो लोक प्राधिकारी द्वारा पद के संबंध में या पदभास में धारण की जाती है।

सूचना का अधिकार क्या है?

इसे सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2 (i) में स्पष्ट किया गया है। सूचना का अधिकार का अर्थ लोक प्राधिकारी द्वारा accussable कर सकती है। इसमें कार्य, दस्तावेज, रिकॉर्ड भी सूचना का अधिकार है।
1.
दस्तावेजों की स्थापित प्रतिलिपि भी इसके अंतर्गत आता है।
2.
सामान के सत्यापित नमूने इसमें आते हैं।
3.
इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रखा गया कोई भी डाटा या जानकारी।

 

 

सूचना का अधिकार अधिनियम के उद्देश्य

§  पारदर्शिता लाना

§  जवाबदेही तय करना

§  नागरिकों को सशक्त बनाना

§  भ्रष्टाचार पर रोक लगाना

§  लोकतंत्र की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना

 

 

RTI अधिनियम के मुख्य प्रावधान -

§  इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत का कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी प्राधिकरण से सूचना प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकता है, यह सूचना 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराई जाने की व्यवस्था की गई है। यदि मांगी गई सूचना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है तो ऐसी सूचना को 48 घंटे के भीतर ही उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

§  इस अधिनियम में यह भी कहा गया है कि सभी सार्वजनिक प्राधिकरण अपने दस्तावेज़ों का संरक्षण करते हुए उन्हें कंप्यूटर में सुरक्षित रखेंगे।

§  प्राप्त सूचना की विषयवस्तु के संदर्भ में असंतुष्टि, निर्धारित अवधि में सूचना प्राप्त न होने आदि जैसी स्थिति में स्थानीय से लेकर राज्य एवं केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की जा सकती है।

§  इस अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद व राज्य विधानमंडल के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और निर्वाचन आयोग (Election Commission) जैसे संवैधानिक निकायों व उनसे संबंधित पदों को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया गया है।

§  इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र स्तर पर एक मुख्य सूचना आयुक्त और 10 या 10 से कम सूचना आयुक्तों की सदस्यता वाले एक केंद्रीय सूचना आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। इसी के आधार पर राज्य में भी एक राज्य सूचना आयोग का गठन किया जाएगा।

§  यह अधिनियम जम्मू और कश्मीर (यहाँ जम्मू और कश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम प्रभावी है) को छोड़कर अन्य सभी राज्यों पर लागू होता है।

§  इसके अंतर्गत सभी संवैधानिक निकाय, संसद अथवा राज्य विधानसभा के अधिनियमों द्वारा गठित संस्थान और निकाय शामिल हैं।

§  राष्ट्र की संप्रभुता, एकता-अखण्डता, सामरिक हितों आदि पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली सूचनाएँ प्रकट करने की बाध्यता से मुक्ति प्रदान की गई है।


क्यों महत्त्वपूर्ण हो जाता है सूचना का अधिकार?

•  सूचना तक पहुँच का अधिकार समाज के गरीब और कमज़ोर वर्गों को सार्वजनिक नीतियों और कार्यों के बारे में जानकारी मांगने और प्राप्त करने हेतु सशक्त बनाता है, जिससे उनका कल्याण संभव हो सके।

•  यह अधिनियम सरकार के सभी कदमों को आम जनता के समक्ष जाँच के दायरे में लाती है।

•  इससे सरकार और सरकारी विभाग और अधिक जवाबदेही बनती हैं एवं जिससे उनके कार्यों में पारदर्शिता आती है।

• यह सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा अनावश्यक गोपनीयता को हटाकर निर्णयन में सुधार करता है।

 


कौन सी जानकारी नहीं दी जाएगी (अधिनियम की धारा 8 के अनुसार)

1.   ऐसी जानकारी जिससे भारत की संप्रभुता तथा गरिमा प्रभावित हो।

2.   राज्य की सुरक्षा प्रभावित हो।

3.   वैज्ञानिक तथा आर्थिक हित प्रभावित हो।

4.   विदेशी राज्यों के संबंध प्रभावित हो।

5.   जिससे अपराध हो या समाज का माहौल बिगड़े।

6.   ऐसी सूचना जिसे देने से न्यायालय द्वारा मना किया हो या जिसे न्यायालय की अवमानना हो।

7.   ऐसी सूचना जिससे संसद या राज्य विधायन के विशेषाधिकार भंग हो।

8.   जब विदेशी राज्यों से विश्वास के आधार पर सूचना प्राप्त की गई हो।

9.   ऐसी सूचना जो किसी व्यक्ति के प्राण और उसकी शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल दे।

10.         ऐसी सूचना जो किसी जांच या विचारण को प्रभावित करें।

11.         कैबिनेट पेपर्स, कैबिनेट मंत्रियों के मध्य का संवाद या बैठक की जानकारी।

12.         व्यक्तिगत जानकारी या ऐसी जानकारी जो निजता के अधिकारका उल्लंघन करें।

जनता के अधिकतम हित के लिए न्यूनतम हित से समझौता किया जा सकता है। इस अधिनियम द्वारा official secret Act,1923 को अभिभावी कर दिया गया ।

 

RTI के समक्ष चुनौतियाँ

  •   जागरूकता की कमी।
  •  प्रदान की जाने वाली सूचना की खराब गुणवत्ता। 
  • समय पर सूचना प्राप्त न होना।
  •  नौकरशाही में अभिलेखों को रखने व उनके संरक्षण की व्यवस्था बहुत कमज़ोर है।  
  • सूचना आयोगों को चलाने के लिये पर्याप्त अवसंरचना और स्टाफ का अभाव है।

 

वैश्विक नजरिए से भारत के सूचना का अधिकार कानून का तुलनात्मक अध्ययन 

विश्व में सबसे पहले स्वीडन ने सूचना का अधिकार कानून 1766 में लागू किया, जबकि कनाडा ने 1982, फ्रांस ने 1978, मैक्सिको ने 2002 तथा भारत ने 2005 में लागू किया।

1.   विश्व में स्वीडन पहला ऐसा देश है, जिसके संविधान में सूचना की स्वतंत्रता प्रदान की है, इस मामले में कनाडा, फ्रांस, मैक्सिको तथा भारत क संविधान उतनी आज़ादी प्रदान नहीं करता। जबकि स्वीडन के संविधान ने 250 वर्ष पूर्व सूचना की स्वतंत्रता की वकालत की है।

2.   सूचना मांगन वाले को सूचना प्रदान करने की प्रक्रिया स्वीडन, कनाडा, फ्रांस, मैक्सिको तथा भारत में अलग-अलग है जिसमें स्वीडन सूचना मांगने वाले को तत्काल और निशल्क सूचना देने का प्रावधान है।

3.   सूचना प्रदान करने लिए फ्रांस और भारत में 1 माह का समय निर्धारित किया गया है, हालांकि भारत ने जीवन और स्वतंत्रता के मामले में 48 घण्टे का समय दिया गया है, किन्तु स्वीडन अपने नागरिकों को तत्काल सूचना उपलब्ध कराता है, जबकि कनाडा 15 दिन तथा मैक्सिको 20 दिन में सूचना प्रदान कर देता है।

4.   सूचना न मिलने पर अपील प्रक्रिया भी लगभग एक ही समान है।

5.   स्वीडन में सूचना न मिलने पर न्यायालय में जाया जाता है। कनाडा तथा भारत में सूचना आयुक्त जबकि फ्रांस में संवैधानिक अधिकारी एवं मैक्सिको में द नेशनल आॅन एक्सेस टू पब्लिक इनफाॅरमेशनअपील और शिकयतों का निपटारा करता है।

6.   स्वीडन किसी भी माध्यम द्वारा तत्काल सूचना उपलब्ध कराता है जिनमें वेबसाइट पर भी सूचना जारी किया जाती है। कनाडा और फ्रांस अपने नागरिकों को किसी भी रूप में सूचना दे सकता है, जबकि मैक्सिको इलेक्ट्राॅनिक रूप से सूचनाओं का सार्वजनिक करता है तथा भारत प्रति व्यक्ति को सूचना उपलब्ध कराता है।

 

 

 

Comments

  1. Along with this, you should also post a performa of RTI application, too so a layman can understand in a better way. By the you have done a great job. I appreciate it.

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    1. धन्यवाद सर,
      अगली बार जरूर इस बात का ध्यान। रखेंगे।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी हैं

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  3. Shivam ji Bahut achi jankari dene ke liye bahut bahut aabhar.kripya 7700003737 es no par sampark kare

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