
विश्व के सबसे महानतम लोकतांत्रिक ग्रंथ भारत का संविधान पारित किए जाने की वर्षगांठ के रूप में आज संविधान दिवस मनाया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय विधि दिवस और भारत का संविधान पारित किये जाने के दिवस के रूप में भी जाना जाता है। वर्ष 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने भारतीय का संविधान पारित किया था। भारतीय लोकतंत्र में आज का दिन जितना पावन है, उतना ही महत्वपूर्ण भी। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की आत्मा अगर किसी को कहा जा सकता है तो वो हमारा संविधान है। इस दिन एक राष्ट्र के तौर पर हमने तय किया था कि अब आगे हमारी दिशा किन निर्देशों पर होगी, किन नियमों के तहत होगी। वो नियम, वो संविधान जिसका एक-एक शब्द हमारे लिए पवित्र है, पूजनीय है।
स्वतंत्रता के बाद जब करोड़ों लोग नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का सपना देख रहे हों, जब विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हौसले बुलंद हों, तो उस समय देश के सामने एक ऐसा संविधान प्रस्तुत करना, जो सभी को स्वीकार्य हो, बहुत आसान काम नहीं था। जिस देश में एक दर्जन से ज्यादा पंथ हों, सौ से ज्यादा भाषाएं हों, सत्रह सौ से ज्यादा बोलियां हों, गांव-शहर-कस्बों और जंगलों तक में लोग रहते हों, उनकी अपनी आस्थाएं है, उन्हें एक मंच पर लाना, सबकी आस्थाओं का सम्मान करने के बाद ये ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार करना सरल नहीं था। आज का दिन देश के संविधान-निर्माताओं को नमन करने का दिन है।
ऐसा कोई विषय नहीं, जिसकी व्याख्या, जिस पर दिशा-निर्देश हमें भारतीय संविधान में ना मिलते हों। संविधान सभा के अंतरिम चेयरमैन श्री सचिदानंद सिन्हा जी ने कहा था-
“मानव द्वारा रचित अगर किसी रचना को अमर कहा जा सकता है तो वो भारत का संविधान है”।
आप सभी को संविधान दिवस (राष्ट्रीय विधि दिवस) की हार्दिक बधाई व ढेरों शुभकामनाएं। हम सभी को संकल्प करना चाहिये कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव प्रगतिशील रहेंगे और संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद रखेंगे। यह ना केवल हमारा अधिकार है बल्कि कर्तव्य भी है।
- शिवम गुप्ता
'विधि छात्र'
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