गाड़ियों पर जाति का स्टिकर लगाने वालों अब आपकी खैर नहीं!

अपने वाहन के नम्बर प्लेट पर जातिसूचक शब्द लिखवाना अपनी शान समझने वालों की अब खैर नहीं! 
जी हाँ सही सुना है आपने, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इसपर सख्ती दिखाई है। आमतौर पर वाहनों पर जाति लिखने का फैशन सा चल रहा है। आजकल सड़कों पर ऐसे वाहनों की भरमार नजर आ रही है, जिनपर जाति का उल्लेख है। अब गाड़ियों पर जाति लिखकर चलने पर कार्रवाई की तैयारी है। यूपी में जाति लिखकर चलने पर गाड़ी को सीज करने  की कार्रवाई की जाएगी। 

 वैसे तो यूपी की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था मे जातीय समीकरण बेहद अहम माने जाते हैं। परंतु केंद्र सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसमें ये कहा जा रहा था कि गाड़ियों पर जातिसूचक स्टीकर लगाने का प्रचलन ज्यादा है, जिसके सांकेतिक अर्थ एक-दूसरी जाति को कमतर दिखाने की कोशिश भी है। या यूँ समाज के ताने बाने पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
सभ्य समाज के लिए इस तरह की भाषा ठीक नहीं. इसी के आधार पर पीएमओ ने यूपी सरकार को पत्र लिखकर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. पीएमओ का पत्र मिलते ही इसे लेकर सक्रिय हुई यूपी सरकार ने गाड़ियों के चालान और सीज करने की कार्रवाई को लेकर सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. यूपी सरकार शुरुआत में लोगों को ऐसा करने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चला सकती है जो जल्द ही हमें शायद दिखाई भी दे जाये।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अब बाइक या कार पर जाति लिखने वालों पर कार्रवाई होगी। नये आदेशानुसार पकड़े जाने पर परिवहन अधिकारी गाड़ी का चालान करके जुर्माना वसूला जाएगा। विभाग ने  इस मामले में अपर परिवहन आयुक्त मुकेश चंद्रा ने RTO और ARTO प्रवर्तन को आदेश जारी करते हुए ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर सीज करने या धारा 177 में चालान करने का आदेश जारी किया है।


यह पहल महाराष्ट्र के शिक्षक हर्षल प्रभु के  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आईजीआरएस पर शिकायत कर उनका ध्यानाकर्षण कराया था परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने यूपी सरकार को निर्देशित किया। इस शिकायत में उत्तर प्रदेश में सड़कों पर चल रहे हजारों वाहनों की नंबर प्लेटों पर जाति लिखाने को सामाज के लिए खतरा बताया था। पीएमओ ने यह शिकायत यूपी सरकार को भेजी थी जिसके बाद योगी सरकार ने यह एक्शन लिया है, जोकि स्वागत योग्य कदम है। हालांकि केंद्र की सरकार को यूपी के अलावा अन्य राज्यों को भी इस प्रकार की कार्यवाही के लिए निर्देशित करना चाहिए क्योंकि बड़ी संख्या में अपने वाहनों पर जातिसूचक शब्द सिर्फ उत्तरप्रदेश तक ही सीमित नहीं है, देश के हर राज्य में अधिकांश सभी लोग अपने वाहनों पर प्रयोग करते हैं। 


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